South Block से Service Mode तक: सत्ता का नया पता ‘सेवा तीर्थ’

गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘सेवा तीर्थ’ भवन परिसर का उद्घाटन कर देश की प्रशासनिक संरचना को एक नए दौर में प्रवेश करा दिया। अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) और कैबिनेट सचिवालय एक ही आधुनिक कैंपस से संचालित होंगे।

यह कदम केवल शिफ्टिंग नहीं, बल्कि गवर्नेंस के मॉडल में बदलाव का संकेत माना जा रहा है — जहां coordination, communication और convenience तीनों को प्राथमिकता दी गई है।

नाम बदले, नजरिया बदला

पिछले कुछ वर्षों में सत्ता के प्रतीकों के नामों में बदलाव हुआ है। South Block अब ‘सेवा तीर्थ’। Central Secretariat बना ‘कर्तव्य भवन’। Rajpath का नाम ‘कर्तव्य पथ’। Race Course Road हुआ ‘लोक कल्याण मार्ग’।

सरकार का तर्क है कि ये बदलाव केवल नामों के नहीं, बल्कि “mindset shift” के प्रतीक हैं — सत्ता से सेवा की ओर।

एक छत के नीचे पूरा सिस्टम

दशकों से केंद्रीय मंत्रालय और प्रमुख कार्यालय अलग-अलग भवनों में काम कर रहे थे। इससे coordination gap, maintenance cost और कार्यक्षमता पर असर पड़ता था।

अब ‘सेवा तीर्थ’ में PMO, NSCS और कैबिनेट सचिवालय को एकीकृत किया गया है। इससे inter-ministerial coordination बेहतर होगा और decision-making process तेज होने की उम्मीद है।

सरकार का दावा है कि इससे policy implementation की speed और public engagement दोनों में सुधार होगा।

डिजिटल, ग्रीन और ओपन वर्कस्पेस

कर्तव्य भवन-1 और 2 में fully digital offices, centralized reception और public interaction areas तैयार किए गए हैं। बिल्डिंग को 4-स्टार GRIHA ग्रीन रेटिंग मानकों के अनुसार डिजाइन किया गया है, जो sustainability की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

नया PMO अब traditional closed-room structure से हटकर open floor model पर आधारित है। ऊंची दीवारों की जगह collaborative workspaces ने ले ली है।

संदेश साफ है: “Less walls, more workflow.”

ग्लोबल मीटिंग्स के लिए हाई-टेक तैयारी

प्रधानमंत्री के निजी कक्ष और बड़े कॉन्फ्रेंस हॉल को भी आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों के साथ उच्च-स्तरीय बैठकों के लिए advanced security और communication systems लगाए गए हैं।

Central Vista क्षेत्र में यह नया ढांचा प्रशासनिक रूप से streamlined governance का दावा करता है — हालांकि राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर बहस भी जारी है।

पहले फाइलें इमारतें बदलती थीं, अब इमारतें फाइलों की स्पीड बदलने का दावा कर रही हैं। नाम बदले, नक्शा बदला — अब देखना ये है कि सिस्टम की रफ्तार कितनी बदलती है।

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